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सर्वोच्च न्यायालय का 7 फरवरी, 2020 का आदेश

मौलिक अधिकार के बहाने आरक्षण पर हमला                                  कमल किशोर कठेरिया ex IRS              संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था पर हमले संविधान लागू होने के समय से ही हो रहे हैं और इसी कड़ी में एक खतरनाक हमला 7 फरवरी , 2020 के दिन हुआ वह भी स्वयं सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा जिस पर संविधान के प्रावधानों की आत्मा की रक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वंचित समाज को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए और रोजगार के अवसरों में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए जो आरक्षण व्यवस्था संविधान में की गई है उस पर उच्च न्यायपालिका का   रुख प्रारंभ से ही नकारात्मक रहा है। यहां तक कि संविधान में पहला संशोधन भी सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा चम्पाकम दोराई राजन बनाम मद्रास राज्य मामले [1] में आरक्षण के विरोध में दिए गए निर्णय के कारण संसद को करना पड़ा था वह भी तब जब आजाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव भी नहीं हुआ था। तब से लेकर आज तक आरक्षण प्रणाली पर उच्च न...